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विभाग के बारे में
भारत में पंचायती राज व्यवस्था, प्राचीन परंपराओं में निहित है और महात्मा गांधी द्वारा समर्थित है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 40 के माध्यम से संस्थागत रूप दिया गया था। लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की अवधारणा को औपचारिक रूप से बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशों के आधार पर 1959 में अपनाया गया था। स्थानीय शासन को मजबूत करने के लिए, 1993 में 73वें और 74वें संविधान संशोधन ने ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया, राज्य चुनाव आयोगों के माध्यम से नियमित चुनाव अनिवार्य किए। 2000 में उत्तराखंड के गठन के बाद, पंचायती राज संस्थाओं (PRI) और शहरी स्थानीय निकायों (ULB) के चुनावों की देखरेख के लिए 2001 में इसका राज्य चुनाव आयोग स्थापित किया गया था। विशिष्ट राज्य अधिनियमों द्वारा शासित, SEC 13 जिला पंचायतों, 95 ब्लॉकों, 7485 ग्राम पंचायतों, 8 नगर निगमों, 43 नगर पालिका परिषदों और 41 नगर पंचायतों में मतदाता सूची और चुनावों का प्रबंधन करता है।
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- आदर्श आचार संहिता के संबंध में (नगर पालिका परिषद, किच्छा और नगर पालिका परिषद, सिरौलीकलां, जिला ऊधम सिंह नगर)
- अधिसूचना- नगर पालिका परिषद, किच्छा एवं नगर पालिका परिषद्, सिरौलीकलां जनपद ऊधमसिंहनगर के अध्यक्षों तथा उनके सदस्यों का निर्वाचन
- उत्तराखण्ड के समस्त जनपदों (जनपद हरिद्वार को छोड़कर) की ग्राम पंचायतों के उप प्रधानों का सामान्य निर्वाचन-2026
- नगर पालिका परिषद, नरेंद्रनगर, जिला-टिहरी गढ़वाल, नगर पंचायत, गढ़ी नेगी, जिला-उधम सिंह नगर, और नगर पंचायत, पाटी, जिला-चंपावत सामान्य निर्वाचन की अधिसूचना
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राज्य चुनाव आयुक्त, उत्तराखंड
श्री सुशील कुमार, आईएएस (सेवानिवृत्त)
Shri Sushil Kumar, SEC, Uttarakhand delivered keynote address at the National Round Table Conference of Election Commission of India & State Election Commissioners 2026
#ECI #SECNC2026
Posted by Election Commission of India on Wednesday 25 February 2026