‘भारत का संविधान’ में किये गये 73वें एवं 74वें संशोधन के फलस्वरूप पंचायत एवं नागर स्थानीय निकायों को संवैधानिक स्तर प्राप्त होने के बाद इन संस्थाओं के पदाधिकारियों का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचन कराया जाना अत्यन्त महत्वपूर्ण हो गया है। इस महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व को समय से पूर्ण करने के लिए संविधान के अनुच्छेद-243-ट तथा 243-यक के अन्तर्गत त्रिस्तरीय पंचायतों, नगर पालिकाओं (नागर स्थानीय निकाय) के कराये जाने वाले सभी निर्वाचनों के लिए निर्वाचक नामावली तैयार कराने और उन सभी निर्वाचनों के संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण हेतु राज्य निर्वाचन आयोग का गठन किया गया। जिसमें एक राज्य निर्वाचन आयुक्त होगा और जिसकी नियुक्ति महामहिम श्री राज्यपाल द्वारा की जायेगी का प्राविधान किया गया है। उत्तराखण्ड राज्य के सृजन के पश्चात् दिनांक 30 जुलाई, 2001 को राज्य निर्वाचन आयोग, उत्तराखण्ड का गठन किया गया। राज्य निर्वाचन आयोग, उत्तराखण्ड के नियंत्रणाधीन प्रत्येक जनपद में एक पंचास्थानि चुनावालय स्थापित है।
राज्य के गठन के उपरान्त राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य के समस्त 13 जनपदों में नागर स्थानीय निकायों के प्रथम सामान्य निर्वाचन वर्ष-2003 में तथा द्वितीय सामान्य निर्वाचन वर्ष-2008 में सम्पन्न कराये गये। त्रिस्तरीय पंचायतों के प्रथम सामान्य निर्वाचन (जनपद हरिद्वार को छोड़कर) 12 जनपदों में वर्ष-2003 तथा द्वितीय सामान्य निर्वाचन (जनपद हरिद्वार को छोड़कर) 12 जनपदों में वर्ष-2008 व जनपद हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायतों के प्रथम सामान्य निर्वाचन वर्ष-2005 तथा द्वितीय सामान्य निर्वाचन वर्ष-2011 में सम्पन्न कराये गये। राज्य में जिला योजना समितियों के प्रथम निर्वाचन वर्ष-2010 में सम्पन्न कराये गये।
नगर निगम देहरादून के सामान्य निर्वाचन तथा नगर पालिका परिषद टिहरी के अध्यक्ष पद के उप निर्वाचन में इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (EVM) का सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया तथा वर्ष-2008 एवं उसके उपरान्त सम्पन्न किये गये समस्त निर्वाचनों के परिणाम इन्टरनेट के माध्यम से जनसामान्य के सूचनार्थ प्रसारित किये गये।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा वर्ष-2001 के उपरान्त त्रिस्तरीय पंचायतों एवं नागर स्थानीय निकायों के निर्वाचनों से पूर्व निर्वाचक नामावलियों का संक्षिप्त एवं विस्तृत पुनरीक्षण कराकर उन्हें अद्यतन कराया जाता रहा है।
आयोग द्वारा यह प्रयास किया गया है कि निर्वाचन से संबंधित विधि व्यवस्थाएं, नियमों एवं उप नियमों तथा इस संबंध में आयोग द्वारा समय-समय पर जारी दिशा निर्देशों की अद्यतन सूचना इन्टरनेट पर जनसामान्य के सूचनार्थ उपलब्ध रहें।
आशा है कि निर्वाचन से संबंधित इन्टरनेट पर उपलब्ध कराई गयी जानकारियां सभी के लिए उपयोगी सिद्ध होंगी।
हरिश्चन्द्र जोशी
राज्य निर्वाचन आयुक्त
उत्तराखण्ड